बृहस्पतिवार, 16 फरवरी 2012

कितनी कितनी बाते है जो
होठों से टकराती नहीं
चिंहुक चिंहुक कर सो जाती
स्वरों  संग लयकाती   नहीं  
मखमली खुद के होने का
एहसास हरदम कराती रही
हर धड़क के साथ उसकी 
गुनगुन  आती जाती रही
मानू उसको सच कितना पर
जग कहे कुछ और सही
छू छू कर लौट जाती खुसबू
 हुई रंगीन कच्ची उम्र की  बही

बुधवार, 15 फरवरी 2012

लड्डू पूरी चटनी अचार
खाने की हिदायत बार बार
लोटने पर पूछेगी कई बार
एक टिफिन ,सागर सा माँ का प्यार

बुधवार, 9 फरवरी 2011

वो पुलकित धड़कन

वो पुलकित धड़कन
बीती खामोशियां
अब भी कसमसाती है
कूहूकना   चाहती है
शालीनता से
जो कभी बस
इक पल चहक कर
रह गई थी
संस्कारों के पैरों तले
वो नन्ही सी
कचनार  जैसी
 पुलकित धड़कन
 अब भी उनींदी है
डायरी के किसी पन्ने तले
और रह रह कर
झांक जाती है
मन के किसी
मोड़ पर
और मैं
 नजरअंदाज नहीं कर पाती !
.....किरण राजपुरोहित नितिला

सोमवार, 10 जनवरी 2011

मैं और तुम

मैं और तुम
गुनगुनाता
खतम होता हुआ
गीत तुम्हें याद कर
फिर से
मन में बजने लगता
तुम्हारी छवि संग
रागें नृत्य करती
रचती स्वर लहरियां,
व्यग्रता की ताल
बहा ले जाती मधुर यादों  में
जहां मुस्कुरा रहे होते
मैं और तुम !
बनकर
हम!
किरण राजपुरोहित नितिला

बुधवार, 10 नवम्बर 2010

तुम्हें पता है ???


तुम्हें पता है ???              कविता


बादलों की अनधुनी
अधधुली रुई
सिमटी है मेरे आंचल में
महसूस किया तुम्हें
मैंने और
भीगे तुम मेरे प्यार में
लहर लहर लहराये
 तुम्हारे इषारे
पत्तियों में छनती धूप की तरह
 मेरे हदय आंगन में
 समेट लिया
तुम्हारे छुए प्यार को
पवित्र ओस की तरह
 और सज गया एक फूल
 मेरे जीवन में
हूबहू तम्हारी तरह !!!!
तुम्हें पता है ???
 वो फूल
 अब भी
इर्द गिर्द ही है
मेरे !!....किरण राजपुरोहित नितिला

मंगलवार, 9 नवम्बर 2010

मेरा नन्हा दीया

मेरा नन्हा दीया
दीवाली की शाम सूरज
जब लौटकर अस्ताचल आया
मेरे नन्हे दीये को देख
मुग्ध हो मंद मंद मुस्कुराया,
मैंने अर्पित की कुछ उसे
किरणें सुनहरे प्रकाश की
हैरत से थाम,फिरा दिया
उसने जहां  अंधेरी रात थी,
सुखी वह धरा की गोद में
बरस की थकन मिटा रहा था
तिमिर दुबका  था ,मेरा
नन्हा दीया मुस्कुरा रहा था!!....किरण राजपुरोहित नितिला

रविवार, 17 अक्तूबर 2010

मैं हूं...


मैं हूं...
मुस्कुराहट पर लरजती
आहटों पर खनकती हूं
सपनों सा सुहाना राज हूं
मानस का गुनगुनाता साज हूं
कविता का रंगमय नभ
बिरखा की तान बरतती हूं
मंदिर में दीपों की दीपिका
आस्था के मन की आरती हूं
कृष्ण में राधा की झांकी
मीरां के मन की बांसुरी हूं
रात का ताना प्रीत का
पिया के प्रेम की ओढनी हूं
चांद रात तारों की खिलखिल
नव सृष्टि की अठखेली हूं
नीरव निशा की आगम  आशा
जुगनू सी दिप दिप रोशनी हूं
अरुणोदय की नितिला मैं!
नव कलरव संग उगती हूं
..किरण राजपुरोहित नितिला